अपने विचारों को ★ निर्विचार होकर , देखने की कोशिश करें ...
खुद को एवं खुद के सोच की परतों को बिना किसी धारणा एवं विचार कि देखने की कोशिश करें ... मेरे कहने का मतलब यह है की... जब एक सकारात्मक विचार आपके भीतर आपके मन में मौजूद होता है तब आप जो भी देखते हैं अपनी आंखों से वह सकारात्मक हो जाता है वह पॉजिटिव हो जाता है जिसका अर्थ है कि अब आप उस चीज से भयभीत नहीं होंगे ।
और जब आपके भीतर एक नकारात्मक एक नेगेटिव विचारों की संरचना होती है , तब आप हर चीज को नकारात्मक तरीके से देखते हो ।

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